पुनरुक्ति अलंकार की परिभषा, भेद और उदाहरण

इस लेख में पुनरुक्ति अलंकार की परिभाषा, उदाहरण, प्रश्न उत्तर, पहचान, अन्य अलंकार से सम्बन्ध तथा भिन्नता आदि का विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया है।

हमने इस लेख को सरल बनाने के लिए अनेक उदाहरणों का प्रयोग किया है जिससे विद्यार्थी सरलता पूर्वक इसे समझ सके।

अलंकार का कार्य काव्य की शोभा को बढ़ाना होता है। काव्य में प्रयुक्त होकर अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने के साथ चमत्कार उत्पन्न करने की शक्ति भी रखते हैं। इन्हीं के कारण काव्य में रोचकता उत्पन्न होती है।

मुख्य रूप से अलंकार दो प्रकार के माने गए हैं ( 1 शब्दालंकार, 2 अर्थालंकार ) पुनरुक्ति अलंकार का संबंध अर्थालंकार से है

पुनरुक्ति अलंकार की परिभाषा

जब किसी काव्य यह पंक्ति में एक ही शब्दों की निरंतर आवृत्ति होती हो पर वहां अर्थ की भिन्नता नहीं होने के कारण वह पुनरुक्ति अलंकार माना जाता है।

उदाहरण के लिए

सुबह-सुबह बच्चे काम पर जा रहे हैं।

उपरोक्त प्रसंग में सुबह शब्द का अर्थ एक ही है जबकि यहां दो बार प्रयुक्त हुआ है। यह काव्य की सुंदरता आदि को बढ़ाने के लिए प्रयोग हुआ है जिससे अर्थ में भिन्नता नहीं हो रही है। अतः यह पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार माना जाएगा।

(पुनरुक्ति दो शब्दों के योग से बना है पुन्र+युक्ति अर्थात बार-बार एक ही शब्द की आवृत्ति हो )

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पुनरुक्ति अलंकार के उदाहरण

उदहारण व्याख्या
हवा दूर-दूर तक जाती है और शीतलता प्रदान करती है। प्रस्तुत वाक्य में दूर शब्द का प्रयोग हुआ है जबकि अर्थ की भिन्नता नहीं है।
आम से मीठा-मीठा रस टपकता है यहां भी मीठा शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है किंतु अर्थ एक ही है।
खड़-खड़ करता करताल बजाता खड़-खड़ शब्द की आवृत्ति एक से अधिक बार हुई है किंतु अर्थ में कोई भी नेता नहीं होने के कारण पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
रंग-रंग के फूल खिले हैं। यहां भी रंग शब्द एक ही अर्थ की ओर इशारा करता है इसमें अर्थ की भिन्नता नहीं है।
आगे-आगे नाचती गाती बयार चली। प्रस्तुत पंक्ति में बयार के आगे-आगे नाचने की ओर इशारा किया गया है।  यहां ‘आगे’ शब्द दो बार प्रयोग में लाया गया है किंतु अर्थ की भिन्नता नहीं है।
सूरज है जग का बुझा-बुझा यहां बुझा-बुझा शब्द दो बार आया है किंतु अर्थ की समानता है।

यमक अलंकार तथा पुनरुक्ति अलंकार में क्या अंतर है?

दोनों अलंकारों के बीच समानता है ,दोनों अलंकार में शब्दों की बार-बार आवृत्ति होती है किंतु एक सूक्ष्म अंतर इन दोनों में भेद उत्पन्न करता है।

यमक अलंकार के अंतर्गत शब्दों की दो या अधिक भार आवृत्ति होने पर उनके अर्थ की भिन्नता होती है। जैसे –

कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय

यहां कनक शब्द दो बार प्रयोग हुए हैं जिसमें एक का अर्थ स्वर्ण दूसरे का अर्थ धतूरा है।

वही पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार में शब्दों की आवृत्ति दो या अधिक बार होती है। जैसे –

आगे-आगे नाचती गाती बयार चली

इसमें आगे शब्द दो बार प्रयोग हुआ है किंतु अर्थ की भिन्नता ना होने के कारण पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

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निष्कर्ष

पुनरुक्ति अलंकार का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि यह शब्दों के बार-बार आवृत्ति की प्रधानता के कारण अलंकार का महत्व है।

इसके अंतर्गत शब्दों के अर्थ एक समान रहते हैं ,इसमें भिन्नता नहीं होती है। जबकि अन्य अलंकारों में एक ही शब्द के दो या दो से अधिक अर्थ निकलते हैं पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार के अंतर्गत शब्दों के अर्थ कभी नहीं बदलते।

आशा है इस लेख को आपने ध्यान पूर्वक पढ़ा होगा और आपके ज्ञान की वृद्धि हो सकी होगी।

साथ ही आपने इस अलंकार को सरलता पूर्वक समझा भी होगा संबंधित विषय से प्रश्न पूछने के लिए कमेंट बॉक्स में लिखें।

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